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यादों का क्या 

किसी वक्त की पैबंद थोड़ी है।

जब भी देखती है तन्हा , चली आती है।

कारवां थकता भी नही रुकता भी नही

जमाने भर की यादें जहन में, जिंदा हो जाती है। 

यही यादें है जो आखिर में कहानी बन जाती है।

और कहानी बोलती जाती है , बोलती जाती है।।

रातों का तो हिसाब नही कितनी जागते गुजरी फिर।।।।

KuldeepDwivedi "Kd"

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