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Kumar VishwasPoetry1 min read

मैं प्रेम करता हूं.....तुमसे

Kuldeep DwivediKuldeep Dwivedi December 8, 2021
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मैं प्रेम करता हूं.....तुमसे
इतना चुपचाप सलीके से
कि कह भी नही पाता 
कि हा मैं प्रेम करता हूं तुमसे।
तुम्हारे गुदाज गालों से नही
तुम्हारे लहराते बालो से नही
तुम्हारी छरहरी काया से नही
पर फिर भी मैं प्रेम करता हूं तुमसे।
तुम्हारी आंखो से 
तुम्हारी बातों
तुम्हारे उलझे हुए सवालातो से
जब डूब जाता हूं तो क्रांति होती है मुझमें
उस क्रांति से प्रेम करता हूं..... मैं
हा तुमसे मुझमें जन्मी उस क्रांति से
प्रेम करता हूं.....मैं
क्या पता शायद तुमसे उतना नही
जितना स्वार्थी हो
उस क्रांति से प्रेम करता हूं.....मैं
और जब तक तुम हो तो क्रांति है मुझमें
इसलिए भी मैं प्रेम करता हूं.....तुमसे
अनंत तक संप्रेषण की संभावनाओं के साथ
स्वार्थी होकर ही सही....पर
प्रेम करता हूं मैं तुमसे.....बस प्रेम.....
__Kd


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