कब होगी बात??'s image
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बहुत सी बाते होती है कहने सुनने को पर मौन हो जाती है। किसी घुप अंधेरे में गुम सी। रोज सूरज भी निकलता है आकाश में चढ़ता हुआ और डूब भी जाता है.....बहुत जल्दी में होता है शायद। दिन बहुत छोटे हो गए है राते लंबी और इस खेल में धूप गुनगुनी सी हो गई है। धुंध बढ़ने को है अब गोलंबर को ढकते हुए उतर जायेगी धरा के आंगन में और घेर लेगी समस्त वन संपदा को जिसमे देख पाना मुश्किल होगा एक निश्चित सी दूरी के आगे। 
वो दूरी जिसके आगे भी धुंध है शायद और पीछे भी।  और ये सन्नाटा इन लंबी रातों का टूटता है किसी सहयात्री के आवाज देने से। पर अब न आवाज ही आ रही है ना कोई पदचाप ही किसी के आने की। अक्सर पूष की राते ऐसे ही गुजरती है ठंड से कांपती हुई रूह छोड़कर। नितांत अकेली ठंडी रूह। जिस पर जमी बर्फ पिघलने में अभी भी न जाने कितना समय बचा हुआ है.....कोई नही जानता कब ये बर्फ पिघलेगी। और जब भी ये बर्फ पिघलेंगी तब ही मौन टूटेगा ये.....
 
Kuldeepdwivedi "Kd"

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