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व्यथाएं विसर्जित

aktanu899aktanu899 March 11, 2022
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कहना सरल है

भूल जाओ अतीत अपना ,


कर दो व्यथाएं सब विसर्जित

शब्दों में ,कब प्रकट हो सके,

भाव सब पढ़ सके कब तुम,

कब तुम जान पाए

अर्थ सब निहित।


तुम्हें ,कैसे लेशमात्र अनुमान भी न हुआ,

सत्य वो, जो सब जग को था विदित।।


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