सुबहों के उजाले हैं's image
Poetry1 min read

सुबहों के उजाले हैं

aktanu899aktanu899 May 24, 2022
Share0 Bookmarks 81 Reads1 Likes

रात के अंधेरों से इतना क्यों घबराना,

रात के सीने में ही छुपे सुबहों के उजाले हैं।


शब न होतीं हो ख्वाब कहां जाते,

रात की नींदों ने ही तो,आंखों में ख्वाब कितने पाले हैं ।


उन झुके कांधों और कमजोर पांवों ने, मजबूती से

न जाने कितने नाजुक सपनों के बोझ संभाले हैं।


यहां उजली- उजली सी बातें जाने कितनी,

हरदम करें हैं वो,जिनके दिल कितने काले हैं।


जो दम हरदम भरते हैं अपनी दोस्ती का,

उनके मन में छुपी हुई, जाने कितनी घातें और चालें हैं।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts