सतही's image
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सोचता हूं कभी-कभी ,

तुम्हारे प्रति जो भावों की गहनता है,

कब अभिव्यक्त हो पाईं शब्दों में,

जो गहनता भावनाओं में है

शब्दों में कब -कहां समा पाई?

सारी अभिव्यक्तियां रह गईं

कितनी सतही,कितनी उथली।


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