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सरासर नादानी है।

aktanu899aktanu899 April 27, 2022
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कई बार,सुनकर किस्सा गैरों की जिंदगी का

क्यों लगता है ,अरे यही तो मेरी भी कहानी है।


रोजी रोटी की जो फिक्र, नयी नस्ल को है आज

उसी फिक्र में कल ,हमने भी गंवायी जवानी है।


जो उसूल हम कलेजे से लगाए बैठे हैं, लोग कहते हैं कि छोड़ो ,

नये दौर में अब इनका चलन नहीं ये सब बातें पुरानी हैं।


माना कभी कोई मिला था यूं ही राह में, पर चाह में उसकी

बिताना तन्हा अपनी उम्र सारी ,ये तो सरासर नादानी है।

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