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सचमुच का जीवन

aktanu899aktanu899 March 14, 2022
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मुझे कई बार लगता है

जो जीवन मैं जी रहा हूं

वो मिथ्या है

कितनी झूठ की परतें चढ़ाए

कितने अनकहे सत्य अंतर में छुपाए

कितने टूटे हुए स्वप्नों का बोझ उठाए

कितने टूटे संबंधों की लेकर पीड़ाए


सचमुच तो मैं

जैसे अपने शब्दों में ही जीता हूं

या जीने का प्रयास करता हूं।

जैसा भी हूं बस उसी तरह

बिना किसी बंधन

बिना किसी मिलावट ।

शब्द जैसे मुझे मुक्ति दे देते हैं।



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