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लौटना कब होता है आसान

aktanu899aktanu899 March 11, 2022
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लौटना कब होता है आसान

छोड़ी हुई जगहों पर ,


कब सरल होता है

छूटे हुए संवाद कायम करना ,


कब आसान होता है

छूटे हुए संबंधों के सिरे फिर से पकड़ना,



कब आसान होता है

टूटे हुए संबंधों को पुनः जोड़ना,



कब संभव होता है कभी

जीना बीते हुए पलों को। 


आने वाले कल से ,आने वाले पल से

न जाने क्यों

रहती है हमको आस इतनी

कि हम ,बिना पश्चाताप खोते रहते हैं

अपने आज को,

कुछ इस तरह

कि खोने का दुख भी होता नहीं।

जब तक दुख जागता है,

पश्चाताप का मन करता है

तब तक,

हो जाता है विलंब इतना

कि कोई अर्थ नहीं रह जाता

इन बातों का।

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