कलुष गीत's image
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कुत्सित कामनाएं मन में बसाए

कलुषित मन लिए

गीत पावनता के गाये ।

रहे सारी कलुषता

अंतर्कलश में कहीं छुपाये।

छुपाकर मन के भाव सारे

सुंदर शब्दों के आवरण में

कितने कुरुप सत्य छुपाये ।

कौन भला झांक पाता है

किसी के मन की गह्वर गुफाओं में

जो कहा जो दिखा ,जो लिखा

बस अर्थ उसी के निकले

जग अनुमान उसी पर लगाये।


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