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कब इतनी होशियारी की

aktanu899aktanu899 March 30, 2022
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दुनिया में रहे पर कब हमने, दुनिया से यारी की   

जो भी किया बस मन से किया कब हमने कोई दुनियादारी की।                                        

भोलेपन में सौ बार लुटे हम अपने ही आंगन में ,

हमने कब खयाल रखा कब इतनी पहरेदारी की ।                                  

सीने में सौ दर्द छुपाया ,पलकों पर छुपाया  मन का सारा पानी 

हमसे हुई जाने कितनी भूलें हमने कीं जाने कितनी नादानी 

धोखा देना सीख न पाये, छल करना न आया हमको

हम नांदां ही भले थे हमने कब इतनी होशियारी की।

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