जीवन पथ's image
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सांसों के अनवरत

उठने गिरने का क्रम है जीवन

सांसों का मौन ही

पूर्ण विराम जीवन का कहलाता है।


जीवन कब रुकता है,

जीवन कब थमता किसी के जाने से,

बिना मौन हुए सांसों के स्वर

कौन भला जग से मुक्ति पाता है।


एक ही पथ न जाने कितनों को

किन किन गंतव्यों तक पहुंचाता है

एक ही पथ कितने

अनजान अपरिचितों को मिलाता है।


एक ही पथ पर एक ही यात्रा करते हुए

पथ लोगों को दृश्य अलग अलग दिखलाता है,

एक ही परिस्थिति में,भिन्न भिन्न लोगों को

जीवन भिन्न भिन्न अनुभव करवाता है ।


कोई सर्वथा संतुष्ट हो जाता

पाकर अपना मनचाहा जीवन ,

कोई मनचाहे जीवन की चाह में

जीवन भर संघर्षरत ही रह जाता है।


कोई जूझता रहता, जीवन भर दुखों से

करता ही रह जाता,क्षण भर के सुख की कामना

किसी पर प्रारब्ध ,

जीवन भर ही सुख लुटाता है।


किसी को प्राप्त हो जाते लक्ष्य सारे

इसी जीवन में थोड़ा चलकर ही

कोई जीवन भर चलकर

लक्ष्य को छू भी न पाता है।


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