डेटिंग's image
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जबसे ललित मोदी और सुष्मिता सेन की प्रेम की खबरें मीडिया में आयीं हैं बहुत से लोग आहत हैं और बहुत से उत्साहित।आहत हैं वो लोग जिनके जीवन में ऐसी कोई सुनहरी संभावना शेष नहीं है।कुछ प्रायः खल्वाट,मोटा चश्मा और मोटे बैंक बैलेंस वाले साठ के दशक में चल रहे लोगों को श्री ललित मोदी जी में अपना प्रेरणा पुरुष नजर आ रहा है। ऐसे लोगों ने अपने मोबाइल फोन में उनका वाल पेपर लगा लियाहै ताकि उनका उत्साह निरंतर बना रहे।वो लोग जिनकी वय,चश्मा ,डील डौल सब कुछ मिलता जुलता है पर बैंक बैलेंस और प्रतिभा की कमी है और जानते हैं कि उनके जीवन में ऐसी कोई संभावना नहीं वो निराश हैं ।चटपटी खबरों में गहरी अभिरुचि रखने वाले चटखारे लेकर इस खबर पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।सोशल मीडिया पर लोग अत्यंत रचनात्मक तरीके से अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।बहुत दिनों बाद कुछ ऐसी खबर मिली है जिस पर खुश होकर कोई खराब प्रतिक्रिया दी जा सकती है।मीम बनाने वालों की कल्पनाओं को पंख लग गये हैं। नैतिकता वादियों से यह अधोपतन पच नहीं रहा है इसलिए उन्होंने अपने सारे तीर तलवार से प्रहार शुरू कर दिये हैं।इसमें ज्यादातर लोगों को इस बात का मलाल है कि साला हमारी जिंदगी में तो ऐसा कुछ होता नहीं और ये बेटा बुढ़ापे में डेटिंग में लगे हुए हैं।इस खीझ को छुपाकर वो तरह तरह से अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।इस बहस में नारी स्वतंत्रता का परचम लहराने वाले भी कूद पड़े हैं । उन्हें नारी की चुनने की स्वतंत्रता के समर्थन का मौका दिखाई दे रहा है।कुछ लोगों को इसमें पूंजीपतियों के विरोध का भी अवसर

ढूंढ़ ले रहे हैं।राजनीतिक दल भी सरकार से अपनी मांगें करने लगें हैं।कुल मिलाकर हर जगह इस बात पर बहस जारी है।


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