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असर नहीं होता

aktanu899aktanu899 October 1, 2022
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उठ गया है तुम्हारे वादों से ऐतबार

अब हम पर तुम्हारी बात का कोई असर नहीं होता।


तुम्हारी याद अब भी अक्सर आती है

राहों पर निगाहें ,आहटों पर कान अब मगर नहीं होता।


लोग अब भी बातों के नश्तर चुभोते हैं

कोई रंज अब उनकी बातों का मगर नहीं होता।


ख्वाब अब भी कितने नये उभरते हैं निगाहों में

अब उनमें मगर तुम्हारा बसर नहीं होता।


तुम्हारी गली की जानिब पांव अब भी खिंचें जाते हैं दिल का रुख पर अब उधर नहीं होता।


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