आज फिर's image
Share0 Bookmarks 54 Reads0 Likes

आज फिर अतीत से एक परछाईं

अकस्मात कहीं से उभर आई।

आज फिर कोई सोया हुआ

स्वप्न सहसा जाग गया।

आज फिर थके मन और क्लांत तन में

नये पथों पर चलने की चाह जगी।

आज उदासियों के घने कोहरे छंट गये

आशाओं की सुनहरी धूप से।

आज फिर कितने दिनों बाद

अचानक तुम्हारी याद आई।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts