अबूझा दुख's image
Share0 Bookmarks 59 Reads0 Likes

कौन सा अबूझा ,अबोला दुख है

जो पैठा जाता है गहरा इस जीवन में,

बेबात ही जाने क्यों

छलक जाते हैं आंखों से आंसू,

बैठे बिठाए बेवजह भर आता है दिल।

आवाज में जाने क्यूं पानी भर आता है

सूख सी जाती हैं आंखें

सीने में कौन सा अकेलापन

फैल जाता है मरुस्थल जैसे

भावनाओं की धरती हो जाती है बंजर।

पांव बस जैसे चलते रहते हैं यंत्रवत आगे,

पीछे कहीं छूट जाताहै अनमना मन,

खो जाते हैं सब पते ठिकाने,

खो जाती हैं मंजिल।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts