Kahan Maloom Tha's image
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समंदर का किनारा होगा, किनारे पे तन्हाई होगी,

लहरों के शोर में ख़ामोशी ढूंढेंगे, कहाँ मालूम था,

किस मोहब्बत से पिरोये थे वफ़ा के मोती इश्क़ के धागे में मैंने,

रेत में बिखरे मोतियों को ढूढेंगे, कहाँ मालूम था। 


बादल की बेचैनी को देखिये, बरसने को बेताब है,

बरसात में कोई आसरा ढूढेंगे, कहाँ मालूम था,

थमी जो बरसात तोह सन्नाटा पसर गया,

सन्नाटे में अब उस आवाज़ को ढूंढेंगे, कहाँ मालूम था। 


तेरी मौजूदगी में तो आँगन गुलशन सा आबाद था मेरा,

अब तेरी खुशबू इन फ़िज़ाओं में ढूढेंगे, कहाँ मालूम था,

चाँद सा रौशन था सारा जहाँ मेरा,

अब एक जुगनू को ढूढेंगे कहाँ मालूम था।


कुछ तस्वीर है, कुछ खत है, किसी दराज़ में,

उस दराज़ की चाभी को ढूंढेंगे, कहाँ मालूम था,

रस्म-ए-वफ़ा की कस्मे तो खूब खाई थी किसी ने,

अब यूँ है के वफ़ा को ढूंढेंगे कहाँ मालूम था।  



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