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Romantic PoetryPoetry1 min read

मुझे मौजें उछाले जा रही है

आकिब जावेदआकिब जावेद November 7, 2021
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कहाँ कोई ख़ज़ाना चाहता हूँ,

ज़रा सा मुस्कुराना चाहता हूँ।


मुझे मौजे उछाले जा रही है,

मैं कब से डूब जाना चाहता हूँ।


नदीम फ़ाज़ली


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