मन के राम's image
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असत्य को सत्य से

सत्यता को जीते।।

कर्तव्य बोध जो हुआ

अहंकार को ताड़ने

अपने मन के राम को

निकाल अब तू सामने।।

विद्वान जो तू हुआ

रावण दिखा तू भेष में

छल कपट प्रपंच सब

अब तू खुद रचने लगा

ग्रंथि अपने मन की

स्वतः तू खुद भरने लगा

मनुष्य ही मनुष्य का

अब शत्रु भी होने लगा।।

युवा पीढी को चाहिए

अपना चरित्र संवारना

मन को भी संभालना।।


-आकिब जावेद

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