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इज़हार-ए-मोहब्बत

AKDVeerAKDVeer December 8, 2021
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कसमें वादे और पक्के इरादे 
बँट गए आधे आधे  
इज़हार-ए-मोहब्बत हुआ कुछ ऐसा  

धडकनें सरपट दौड़ी तेज़ 
चुनरी को सतरंगी कर रंगरेज़ 
इज़हार-ए-मोहब्बत हुआ कुछ ऐसा

ज़ुबान फिसली अलग-थलग 
कुछ और ही कहा लगभग   
इज़हार-ए-मोहब्बत हुआ कुछ ऐसा 

गुलाब दिया महबूब को हमने 
और खुद ही लगे शरमाने 
इज़हार-ए-मोहब्बत हुआ कुछ ऐसा  

हँसकर हमने इज़हार था अब किया
हिम्मत कर शब्दों को संभाल लिया
इज़हार-ए-मोहब्बत हुआ कुछ ऐसा 

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