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सभ्यताएँ और प्यार

Akash GuptaAkash Gupta December 20, 2021
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पनपती है सभ्यताएँ जैसे नदी किनारे 

पनप रहा है प्यार तुम्हारा मेरी आँखों के पास

और झरनों से गिरता-पड़ता जल ले जाता है 

जैसे उन सभ्यताओं की निशानी 

वैसे ही आँसू ढुलक ढुलक बह जाते है 

और सुनाते मेरी प्रेम कहानी .  

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