परिभाषाएँ प्रेम की's image
Poetry1 min read

परिभाषाएँ प्रेम की

Akash GuptaAkash Gupta December 4, 2021
Share0 Bookmarks 150 Reads2 Likes

परिभाषाएँ प्रेम की ढूंढ कर मैं थक चुका हूँ 

सोचता हूँ प्रेम अगर पवन होता तो कैसा होता ?

पवन, जो बहती मुझसे ओर तेरी या 

तुम से पास हमारे

ना संदेशों की आवश्यकता होती 

ना उन प्रतीक्षाओं की 

ना खेद ना मिलने का 

ना टूटी प्रतिज्ञाओं की 

कैसा होता पवन अगर विद्युत होता 

हम दो इस नदी की आर-पार 

संचित करता प्रेम, प्रवहित जल के द्वारा 


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts