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माँ के भटकने में

Akash GuptaAkash Gupta May 9, 2022
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How maa remembers me from India...

माँ के भटकने में 

मुझ पर अटकने में 

डपटती बलाएँ होगी 

चावल फटकने में 


कमरे से रसोई में 

आटे की गोल लोई में 

घूमती होगी दुनिया सारी 

बेटे की बटोही में 


घंटे घटाती होगी 

सूरज ढाहती होगी 

मुझ से पहले वो खुद को

कैसे सुलाती होगी 


मेज देखती होगी 

सब कुछ सेजती होगी 

बढ़ गया होगा घर का कचरा 

न कचरा मेरा बेचती होगी 


माँ के भटकने में 

मुझ पर अटकने में 

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