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क्या है जरुरी?

Akash GuptaAkash Gupta December 15, 2021
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क्या है जरुरी?

मन के विचार 

निकले हमेशा कविता बनकर, 

या जीवन का गद्यांश होना सच्चा है 

प्रवहित रहे, मन सागर में बहते रहे 

या मन समर में जीवित रहे तो अच्छा है 

उतरकर कागज़ पर न जाने 

क्यों वो मर सा जाता है 

और बिकते बाज़ारों में फिर मौल लगाया जाता है 

दुखता तन बदहवास रहे तो अच्छा है 

हथेलियों की थापें खाने से बेहतर

एक मन की आवाज रहे तो अच्छा है।  


क्या है जरुरी मन में उठते चित्र कई जो

कुंचियों में भरकर, 

 रंगों की भेट चढ़े?

या जीवन के चित्र फलकों पर छप जाना अच्छा है 

जाए बिखर प्रतिबिम्बों में वो चित्र कई

या मन में सम्पूर्ण रहे तो अच्छा है 

टंगा-टंगा दीवारों पर वो धूमिल सा हो जाता है 

और बदहवास विचारों वाला मन उस में खो जाता है 

मोह, विचार, स्वप्न हज़ार उसे देने से बेहतर 

एक मन की पहचान रहे तो अच्छा है।  

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