बीच के  दर्रे's image
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इन मकानों के बीच जितने दर्रे है 

उतना ही दर्रा मैं छोड़ना चाहता हूँ

अपने रिश्तों में 

ताकि न लगे हममें से किसी को भी 

कि खड़े है 

एक दूसरे की बदौलत हम 

ना बरसात-आँधियों में हम एक दूजे का सहारा ढूंढे 

बस हम पास रहे और कभी न आँखे मूंदे 

मेरी ऊष्मा मेरी नाराजगी का का एहसास तो कराए 

पर उसे झुलसाए न  

मेरे धार्मिक ख्याल उसके दरवाजे पर 

दस्तक दे वो उन्हें सुने 

पर अंदर जाते ही 

वो छोड़ जाए उनको बहार

और उपजाए नए विचार 

मैं छोड़ देना चाहता उतना दर्रा क्योकि 

हम किसी तीसरे विचार या आदमी का 

विचरण सहन कर सके 

और कभी हमारी चूमती छते 

बचा सके किसी राहगीर को 

बरसात से 

मैं अपने प्रेम में इतना भी निष्ठुर नहीं होना चाहता 

की कोई राहगीर पाए ही न 

एक कोना हमारे प्रेम के तले 

इसलिए मैं छोड़ देना चाहता हूँ दर्रा 

अपने रिश्तों में इन मकानों की तरह


फ्रांस के किसी खूबसूरत गांव में! 

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