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अस्मिता हिन्दोस्तान की

Akash GuptaAkash Gupta October 2, 2022
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डगमगाई या बुझी शमा वतन-ए-जान की?

जिस वक़्त लुट रही थी,अस्मिता हिन्दोस्तान की

न फिक्र है न जिक्र है बेटी के अभिमान की

देख अस्थियां जलनी बाकी तेरी झूठी शान की

ना किसी को अँधा कहकर मैंने उसका परिहास किया

न अंग प्रदर्शन करके अपना,ब्रह्मत्व का उनके त्रास किया

मैं तो अठ वर्ष की कन्या कोमल अति सुकुमारी थी

मै भी नूर बाबुल का अपने माँ की राजदुलारी थी

मैं भी हँसती थी,खाती थी और खेलने जाती थी

स्त्रीत्व पर मै भी अपने बड़े नाज दिखलाती थी

पर हे श्वानो!हे पामरो! क्यों नोच तुमने मुझको डाला

अंधे होकर बैठे कैसे कैसा गटका तुमने हाला

क्या कन्या पूजन में मैं एक कन्या नहीं दिखलाई दी तुमको

माता को पूजो दर दर जाकर क्या उसने गवाही दी तुमको

तुम भी नारी सुता हो,बहिन,बेटी भी तेरी नारी है

मत भूलो यदि मै अबला हूँ तो वो भी सब बेचारी है

चल अब तेरे पौरुष की कथा सुनाती हूँ तुझको

पाकर जिसके बल की छाया निर्ल्ल्ज़ तूने नोचा मुझको

छिन,छपट मत मांग-मांग बेगैरत नेता बन जाते है

मन के जंगली,जंगल का हक पाकर ठन जाते है

न कृष्ण कोई आया,ना चिर मिला कोई मुझको

हय ये कैसा कलयुग जो दंड न मिला तुझको

अब तो कृष्ण बनो कोई, कोई कल्कि अवतार बनो

ले कनिष्का में आज सुदर्शन इनका तुम संहार करो

मेरी अंतिम निंद्रा का स्वप्न पूरा कर डालो

या कुछ क्षण का जीवन मुझको वर मे दे डालो

अस्त्र दे दो,शस्त्र दे दो और क्रोधो की ज्वाला दो

ठहरो क्षण भर तुम और रुण्ड-मुण्ड़ की माला लो

रोती आँसू माँ के दुःख का निवारण क्या होगा

कोस रही है मोह को अपने हाय दृश्य क्या होगा

काश मैं इसे स्वयं मारती ग्रसित भ्रूण हत्या पाप से

बच तो जाती मासूम मेरी दरिंदो के वेह्शी ताप से

किससे अब इन्साफ मैं माँगू किसके हृदय पर घात करू

किससे बोलू,किससे खेलु,किसके सर पर हाथ धरु

किस सरकार के आगे जाकर रोऊ दुखड़ा अपना

घर दे,श्रय दे बैठे है जो भूले कर्तव्य अपना

प्राचीर पर लाल किले की चिल्लाने वाले चुप बैठे है

देश उद्धारक,दुःख हारक जाने किसकी धुन में ऐठे है

ये गन्दी राजनीती के कीड़े,एक थाली के चट्टे-बट्टे है

इनको सत्ता ही प्यारी ये कुर्सी के सारे सट्टे है

आती जाती सरकारों में हमको क्या मिल पाता है

शदियों पहले लिखा गया निबंध नही हिल पाता है

यदि न्याय नहीं दे सकते मुझको वचनों को अपने तोड़ तो तुम

खाते हो जिस धरा के आंचल का,उसको माँ कहना छोड़ दो तुम

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