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अगर प्रेम पवन होता

Akash GuptaAkash Gupta December 4, 2021
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अगर प्रेम पवन होता तो 

बह जाता उन दोनों के बीच 

सरल हो।  


अगर प्रेम जल होता तो 

बह जाता उन दोनों के बीच 

तरल हो।  


खड़े नदी के आर पर जो 

दो अलग-अलग किनारो पर 

और खुरच रहे है जले प्रेम 

की रांखे खाली, 


अगर प्रेम पवन होता तो 

ले जाता बहा उन अस्थियों को 

और कर देता सुगन्धित 

उस पवित्र सत्यता की जो 

बहा नेत्रों से तरल बनकर 

प्रेम जल ही होता 

क्या पता पिघला देता कठोर हृदय 

तरल बनकर। 

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