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कवि की बातें निराली

mitra ajay gautammitra ajay gautam November 5, 2021
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कवि की बातें निराली|
कल्पना के लोक में नित, वह मनाता है दिवाली|

जब सुनहरी कामना सी लक्ष्मी प्रिया बनकर आती|
दीप जलते हैं खुशी के मन में भी ज्योति जलाती||
कर समर्पित कर्म सारे, उसको ही वह कर्ता बनाती|
रोशनी जो देखते हो, कविता वह उससे ही पाती||
कर्म सारे हैं उसी के, वह बस बैठा रहता खाली|
कवि की बातें निराली|
कल्पना के लोक में नित, वह मनाता है दिवाली|

है अमोघ उसका तूणीर, रखता जो शब्दों के तीर|
एक के बाद एक चलाता बच न पाए कोई वीर||
है विनायक ही विधायक, रचते जो सुंदर शरीर|
पूजता वह बस उन्हीं को, हरते जो सबकी पीर||
गण के गीत गा रहा जनमन बजाता खूब ताली||
कवि की बातें निराली|
कल्पना के लोक में नित, वह मनाता है दिवाली|

शारदा से प्रीति करके मन कवि का श्रद्धावनत|
भाल पर मां भारती कर तिलक करती है उन्नत||
प्रेरणा ऐसी पसारी प्रजा करती मन से स्वागत|
भाग का लेख लिखने, लेखनी चलती अनवरत||
वाणी का वरदान पाकर गीत रचता गौरवशाली|
कवि की बातें निराली|
कल्पना के लोक में नित, वह मनाता है दिवाली|
-अजयसिंह गौतम 9300280390 05/10/21

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