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बाज़ार वाले चांद ने मुझसे दोस्ती कर ली

Ajay Singh YadavAjay Singh Yadav April 19, 2022
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मुझे बाजार में दिन में एक चांद मिला
चांद को देख मेरा अंतर्मन हिला ।
उसकी चांदनी के सामने सूरज की चमक भी फीकी पड़ गई 
मेरी आंखे उसकी चांदनी को देखकर चकरा गई ।
मैंने उस चांद से दोस्ती के लिए अपना हांथ बढ़ाया 
वह चांद पहले थोड़ा शरमाया और मुस्कराया ।
उसकी मुस्कराहट के सामने आसमान के चंद्रमा की भी चांदनी फीकी पड़ गई 
मेरे दिल के धड़कन में हलचल सी मच गई।
बाजार में चांद ने मेरी लाज़ रख ली 
अपना हांथ बढ़ाकर मुझसे दोस्ती कर ली ।
मुझे बाजार में दिन में एक चांद मिला
चांद को देख मेरा अंतर्मन हिला । 
                  - अजय सिंह यादव

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