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खुशबू की जरूरत

Ajay kishorAjay kishor September 17, 2022
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यूँ ही नहीं मेहफिल सजती
हर बाग से फूल आता है
खुशबू तो हर फूल में होती है
रंग तो पर तितली से आता है

हम सोचें, छुयें इससे पहले उड़ जाती है
ना जाने कौन खबर पहुंचता है

खुशबू की जरूरत तो उनको भी होगी
कौन बेवजह बाग में फिरने आता है

ये जो मेहफिल सजी है आस पास हमारे
इन्ही में से कोई हर शाम, उनका रंग चुराता है

वो भी खुश हैं उन्हे खुशी देकर
भवरा बे मतलब बवराता है

भवरा भी मजबूर है 
उसका दिल जो पागल है, वर्ना
कौन अपनी इज्जत नीलाम करवाता है

मोहब्बत से दूर ही रहना ये काम नहीं अच्छा
मोहब्बत के चक्कर में सभ्य इंसान बावला हो जाता है

मिली जब उनसे नज़र एहसास ये हुआ
दिल का हाल नज़रों से दिल में कैसे उतारा जाता है

शक् हो गर तो परख लो
आशिक परीक्षा से कब घबराता है

घर में देखा रसोई खाली है
देखकर मेहबूब दरवाजे से लौट जाता है

देखा उन्हें चौराहे पर किसी के साथ, घबराये वो और हमारा डर हमको डराता है

अच्छा है

इसका मतलब ज़िंदा वो भी हैं
मरने का डर उन्हें भी सताता है



लेखक:- अजय किशोर
मोबाइल ना. :- 9999191546
इंस्टाग्राम न:- ajaykishor88 


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