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तेरी तृष्णा

Ajay JhaAjay Jha August 29, 2022
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बिन तेरे जीवन जीने कि
ना मुझको कोई आस रही
मैं वो बेकल सा सीप प्रिये
जिसको स्वाति कि प्यास नही।


तेरी तृष्णा हि रही सदा
तुझ तक हि माया लोभ रहा
तेरे बिन अब ना मुझको
इस जग का कोई लोभ रहा


अजय झा **चन्द्रम्* 

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