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रस्मे-कसमें

Ajay JhaAjay Jha March 7, 2022
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ये दुनिया कि रस्मे, सभी झूठी कसमे
ना मुझको ये भाये, आए हाय- आए हाय

हैं बातें बहुत सी, कहा किस् से जाए
समझ में न् आए, आए हाय- आए हाय

हैं  घड़िया बहुत् कम, किससे बांटे दर्दे गम
सहा भी ना जाए, आए हाय- आए हाय

गए तुम हो ऐसे, बीती सदियां हो जैसे
कैसे भुला ये जाए, आए हाय- आए हाय


है सर्दी गई, गर्मी फिर से है आई
फर्क मुझको ना आए, आए हाय- आए हाय

बदले मौसम बहुत पर,  न मेरा दिल हैं बदला
कौन इसको बताए, आए हाय- आए हाय

है चाहत बहुत पर, पूरा किसपे करें  हम
अब इसे छोड़ जाए, आए हाय- आए हाय

चलो तुम बरी हो, मेरे मन आशियां से
अब ये जी मान जाए, आए हाय- आए हाय

अजय झा **चन्द्रम्**

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