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मैं, तलवार

Ajay JhaAjay Jha August 29, 2022
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बड़े दिनों के बाद सही, खुश हूं कि ये बात छिड़ी
बन्दूक-बमों के दौड़ मे, मेरी भी जरुरत आन पड़ी।


लोहार लहु और म्यानों से, मेरा अभिन्न सा नाता है
धारण करे मुझे जो कोई, मेरा समर्पण पाता है।


अस्त्रों कि परिभाषा में, रक्षण-भक्षण है मुल रहा
और समर के मध्य मैं, कर्तव्यों संग हुं झुल रहा।


विश्व कि गौरव् गाथा मे, मेरे कई नाम उल्लेखित् हैं
अनगिनत वीर वीरांगना संग अपनी ख्यति भी वर्णित है।


रहा लेखनी का ऋणी सदा, जो जिवंत मुझे कर जाती है
जग मे बिन रक्त्त पात के, मेरे कार्य सरल कर जाती है।

अजय झा **चन्द्रम्**

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