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बरसों बाद - भाग १

Ajay JhaAjay Jha October 10, 2022
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बरसों बाद बरसी है, बेइंतहा बरस
बरस यूं कि, बह जाए मेरी बेबसी
मेरी बेसब्र , बेहयाई पर बरस
बरस आज, हर बहाने से
कि बह जाए, हर बद मेरे बदन से।


बरसों बाद बरसी है, बेतरतीबी से बरस
बरस यूं कि बदल जाए, मेरी बेहुदगी
मेरी बेइमानी पर बरस
बरस आज बेबाक होकर
कि बेदाग हो जाए,ये वजूद इस बहाने से।


बरसों बाद बरसी है, बेवजह नहीं बरसी
बेपरवाह हो बसर कर मेरी बाहों में।


अजय झा **चन्द्रम्*

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