मैं बिना देह के चल दूँगा's image
Swatantrata DiwasPoetry1 min read

मैं बिना देह के चल दूँगा

Adyant VatsAdyant Vats February 2, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
धमनी से जब रक्त बहेगा,
अंग-अंग कट के जो गिरेगा।
उस लहु का श्रृंगार करूँगा,
फिर दुश्मन पर वार करूँगा।

भुजबल से प्रहार करूँगा,
शत्रु का संहार करूँगा।
लड़ता तबतक देह रहेगा,
बूँद एक भी शेष रहेगा।

यदि मूर्छित मैं हो जाऊँ,
मृत्यु की शैय्या पर जाऊँ।
ये देह समर्पित कर दूँगा,
पर शर्त एक ये रख दूँगा।

लेने जो मुझको यम आयें,
ये बात समझ कर ही आयें।
मातृभूमि जब मुझे बुलाये,
क्षण भर भी लगने ना पाये।

है मानव का उत्कर्ष यही तो,
हो पूरी यह शर्त नहीं तो।
विधि-विधान को छल दूँगा,
मैं बिना देह के चल दूँगा। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts