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मुझको ये डर बहुत सताता था

Avinash trivediAvinash trivedi September 17, 2022
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मुझको ये डर बहुत सताता था
मुब्तला रहते थे मुझसे मेरे अपने ।

मैंने एक उम्र काटी है डर में
भेज न दे कोई मुझे घर अपने।

थे सवालात पूछने लायक लेकिन
रह न पाते फिर अपने अपने।

शायरी सुन के भी लोग मज़ा लेते है
ये साझेदार भी सिर्फ लगते है अपने।


अविनाश त्रिवेदी

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