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तुम और मेरे दिल का कैनवस

aditishukla1707aditishukla1707 March 22, 2022
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बेहद मुश्किल होगा 

तुम्हें अपने दिल के कैनवस पर उतारना 

शायद उतना ही मुश्किल जितना 

बहते हुए पानी पे पानी लिखना .. 

मगर मैं फ़िर भी करूँगी कोशिश 

तुम्हें उतारने की 

तुम्हारी आँखों की बारीकी को 

तुम्हारे माथे पे फैले हुए बालों को 

जो तुम्हारे माथे की शिकन छुपाते हैं 

उतारूँगी मेन उन पलकों को 

जो पर्दा कर लेती हैं 

मुझसे जब मैं सामने आती हूँ ..

उतारूँगी मैं तुम्हारे होंठों की बनावट को 

ठीक वैसे ही जैसे तितलियों की छाप 

हाथों पे उतर आती है .. 

मगर तुम्हारी ख़ुश्बू का क्या करूँगी मैं ? 

वो कैसे उतारूँगी मैं अपने कैनवस पर ? 


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