लेखक's image
Share0 Bookmarks 13 Reads0 Likes
क्या देश ? क्या काल ? क्या परिस्थिति ये सब से लेखक का क्या ? 
कौन से देश के किस शहर में कौन से काल में बैठ कर मैं ये लिख रहा हूँ मुझे इसका ज्ञात नहीं , मुझे तो इसका भी ज्ञात नहीं की मैं लिख क्या रहा हूँ । इतना मालूम पड़ रहा है की की हाथ की उँगलियाँ ज़रूरत से ज़्यदा तेज़ चल रही हैं , कोई एक टुकड़ा पकड़ी हैं कस कर उँगलियाँ जिस पे दबाव डाली चली जा रहीं हैं 
मानो कहानी लिखने का ज़िम्मा उस विचारी कलम का हो । 

चाय बनाने की समाग्री , राजमा पकाने का नुस्ख़ा , अचार को लम्बे समय तक टिकाने का झंझट ये सब से हमारा क्या ? हमें तो इतना भी याद नहीं होता की कब किस दिन की याददाश्त से क़र्ज़ में कौन सी कहानी ली थी ।

सत्ता में किसकी सरकार गिरायी गयी , आज लाल क़िले के पास किस बात का प्रदर्शन हुआ , बँटवारे में किसकी कितनी ज़मीन छूट गयी ? हमें इन सब से क्या ? हमें इतना पता होता है बस कब कहाँ पुस्तक मेला लग रहा , 
कब कहाँ कवि सम्मेलन हो रहा और कब लाइब्रेरी में एकांत मिलेगा ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts