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अंत सबसे पहले लिखा गया था

aditishukla1707aditishukla1707 September 27, 2022
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एक दिन हमारे ना रहने की खबर कोई ऐसे ही फ़ोन में तस्वीर के साथ पढ़ेगा और कुछ देर शांत रहेगा , आस पास बैठे लोगों से हमारे बारे में कुछ बातें करेगा , बताएगा सबको की एक ज़माने में हम लोग कितने ख़ास हुआ करते थे एक दूसरे के और फ़िर कोई वक्त की आंधी को मुजरिम बताएगा  
हमारे रिश्ते में दूरी लाने को  । 

किसी के ना होने की खबर का असर सब पर अलग अलग पड़ता है , हमारे होने की अवधि जैसे हमारे ना होने पे दुःख की अवधि भी होती है । कोई ख़बर सुन कर दो मिनट का मौन रख बायाँ करता है अपना दुःख , कोई हमारे ना होने की  खबर की बार बार पुष्टि करता है वो ही उसका दुःख होता है क्यूँकि वो सच को झुठलाना चाहता है , कोई आसपास बैठे लोगों से हमारे चर्चे कर के दुःख व्यक्त करता है , कोई तस्वीर पे माला चढ़ा कर करता है दुःख व्यक्त , कोई अध्यात्म का पालन करने वाला सबको ये समझाता है की हम मृत्यु के बाद ११ दिनों तक अपनों के ही आसपास रहते हैं  , ये सबको बतलाना ही उस आध्यात्मिक व्यक्ति का दुःख होता है , वो खुद को सांत्वना देता है की अभी ११ दिन और हैं उसके साथ रहने को , कोई दुःख ही नहीं करता है व्यक्त , ये सबसे बड़ा दुःख होता है जो व्यक्त तक नहीं हो पाता है बस कुढ़ता है अंदर  । 

वहीं कहीं कोई होगा जिसे हमारे ना होने की ख़बर एक साधारण खबर लगेगी  जैसे हम अख़बार में सिर्फ़ अपने काम की खबरें पढ़ते हैं और बाक़ी खबरों का पन्ना फ़ेर देते हैं ।

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