दुनिया's image
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ये दुनिया भी है यारो अजीब सी एक दुकान

गली गली में बेच रहा खून इंसान का इन्सान

ज़ख्मों के गलीचों पर यहां मन रहे हैं जशन

इंसानियत का हर एक कतरा हो रहा है दफन 

माली खुद ही रौंद रहा ना जाने हर क्यों फूल यहाँ

खुदगर्जी ने बदल दिए कुदरत के सब असूल   यहाँ

दर्द उतना ही बड़ा देगा ,जो जितना दिल के करीब यहाँ

वफा के बदले कभी न होगी ,आग आखरी नसीब यहाँ

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