तितली's image
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सुनो,

ये तुम्हारा

स्पर्श ही है

जो मैं एक

कोषस्थ,

निष्क्रिय

रूप से आज

इतने सुंदर रंग

ओढ़ कर

तितली बन

निकली हूँ!


#अबोध_मन//“फरीदा”


सुनो, ये तुम्हारा प्रेम ही है...जिसने मुझ अबोध में प्रेम के साथ

एक रत्ती समझ भी भर दी है..और मैं अब

चढ़ने लगी हूँ परिपक्वता की सीढ़ियाँ।

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