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अभी जीना है मुझे..!

अबोध मनअबोध मन December 16, 2021
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नींदों से डरी है कि उसे फिर खोना नहीं है,

अंधियारों से लिपट के उसे अब रोना नहीं है,

परत दर परत गमों की चट्टान बना सीने में,

बर्फ़ बन रही है जिसे अब पानी होना नहीं है।


सैलाब तो उसने ख़ुद ही लिखे अपने हिस्से,

बारिश ने कहा था; उसे अब भिगोना नहीं है।

तकदीर लिखने वाले को, ज्यादा प्यार आया,

तदबीर कोई कर लूं, मैं कुछ होना ही नही है।


ज़माने के सही गलत से मुझे लड़ना नहीं है,

जिस हवा में हो घुटन वो सांस भरना नहीं है,

मुजरिम नही थी फिर भी मुजरिम बता दिया,

उन्हें कह दो मुझे जीना है अभी मरना नहीं है।


©अबोध_मन"फरीदा"✍

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