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Aalok ShrivastavPoetry1 min read

कोई कबूतर मोहब्बत का पैगाम नहीं लाया ..

Atul FarrukhabadiAtul Farrukhabadi October 26, 2022
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सब जमीं पे है कोई आसमान में नहीं आया

खैरियत है, कोई बगाबती जुबान में नहीं आया।।


खौला हुआ था खूँ फिर जम गया होगा!

कोई दरिया अबकी उफान में नहीं आया।।


बड़े शुकून से है वो मौकापरस्त लोग

कोई बगावत को उनके दरम्यान नहीं आया।।


इस दीवाली भी खाली हाथ लौट आया मजदूर,

इस बार भी हाथ में कोई सामान नहीं लाया।।


परिंदों से नाराज़ सी है घर की खिड़कियां सभी

अबकी कोई कबूतर मोहब्बत का पैगाम नहीं लाया।।


दीवाली थी तो घर याद आना लाज़मी था साहब ,

जब याद आई मां फिर कोई दुसरा चेहरा ध्यान में नहीं आया ।।



अतुल फर्रुखाबादी


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