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मेरी कविता

Abhishek YadavAbhishek Yadav May 4, 2022
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ये उतार ये चढ़ाओ।
 ज़िन्दगी के ये पड़ाव।
ये उबड़ खाबड़ रास्ते।
चल भी दो खुदके बास्ते।
सोच समझ की रीत अनोखी।
जो दिल साजे उससे प्रीत लगाओ।
 जीवन पीड़ा मौत भी पीड़ा।
 पल जितने हैं हंसकर बिताओ।
ये काम काज की उलझन गहरी।
सुकून अपना खुद बनाओ।
ठोकर खाकर गिरना भी है।
हाथ देकर खुदको उठाओ।
ये जंग मजहबों की छोड़कर।
नया गुलिस्तां तुम बनाओ।
राम भी जानो अल्लाह जानो।
इंसानियत को भूल न जाओ।
ये उतार ये चढ़ाओ।
 ज़िन्दगी के ये पड़ाव।

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