ज़िंदगी's image
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ज़िंदगी समझा रही है

कुछ तो बता रही है

ठोकरें दे देकर

वो जीना सिखा रही है


हर सुबह की ओट में

बात तो कुछ है होती

ख्वाबों से जागकर वो

हक़ीक़त में है सोती


दुनियां से हटकर

अपनी एक पहचान बनाना

काम अगर करना कोई अच्छा

हर किसी को मत बताना


छोटे छोटे वादों से

एक रिश्ता पक्का बन जाता

जब साथ समय देता है अपना

तो सिक्का खोटा भी चल जाता


हल्की सी मुस्कान होंठ पे

छवि में रौनक आ जाती

अंतर मन से शांत हो गर

हर चीज़ इस दिल को भा जाती...!!


अभिषेक विश्वकर्मा

हरदोई, उत्तर प्रदेश

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