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Love Poetry1 min read

ज़िंदगी | लबों के गीत

Abhinav SinghAbhinav Singh September 22, 2020
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ज़िन्दगी उस पार है

मैं धार के विपरीत हूँ

फिर भी

वो लबों की गीत मेरी

मैं भी उसका गीत हूँ


वो है जन्नत जिंदगी की

थोड़ा मैं बेढंगा सा 

मन है पावन ऐसे उसका

गंगोत्री की गंगा सा 


लम्हों का बस फासला है

लम्हों में ही जीत है

मिलना है बस लम्हों में

वो मेरा जो मीत है


क्योंकि

वो लबों की गीत मेरी

मैं भी उसका गीत हूँ

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