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देखने की चाहत

Abhinav SinghAbhinav Singh January 22, 2022
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नज़र टिकी रह जाती हैं
वो देख जिसकी अभिलाषा थी
कुछ परिदृश्य होते हैं ऐसे
जिन्हें जरूरत नहीं परिभाषा की

~ अभिनव

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