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अजब सी कशमकश, जाएँ तो कहाँ जाएँ

Abhay JhaAbhay Jha October 7, 2021
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आँखो मे जुगनू , पलको पे घटायें,

अजब सी कशमकश, जाएँ तो कहाँ जाएँ..


मेरे किरदार मे इस कदर है शामिल वो

कोई खुश्बू लगाऊं, तो महक उसकी आए..


चाँदनी रात है, और ये तारों की सिलवटे,

जो देखूं आसमा, तो मुझे वो नज़र आए..


बदन की लिखावट, या आँखो का काजलपन,

नाराज़गी रंगोली सी, उसकी नवाबी अदाएँ


मैं तो मैं हूँ, आईना तक दीवाना है

जो खुद को देखें तो वो नज़र आए..!!

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