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टुटा हुआ तारा हो गया हूँ!

Abhay DixitAbhay Dixit February 7, 2022
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में तुम्हारी मांगी हुई चाह का,
टुटा हुआ तारा हो गया हूँ,
जिसे तुम ही जानती हो बस,
और में तुम्हारा हो गया हूँ।
न जाने कितनों की चाह बना होगा में,
उस टूटते वक्त में,
जिसकी चाह पूरी हुई होगी,
में आसानी से उसी का हो गया हूँ।
किसी ने नहीं पूछी मेरी चाह ,
किसका लिए के टूटा था,
और किसका हो गया हूँ।
में तो बड़ा ही छ्ला गया,
मुझे बिन जाने ही बुरा-भला कहा गया,
जिसकी चाह पूरी हुई ,
उसका तारा हो गया हूँ।
मुझसे किसी ने नहीं पूछा,
मुझे किसकी चाह रही होगी,
में हजारों चाह का महज,
टुटा हुआ तारा हो गया हूँ।
जिसकी पूरी हुई उसकी लिए,
प्यारा हो गया हूँ।
वार्ना यूँ ही न सुनने वाला,
टुटा हुआ तारा हो गया हूँ।।
~अभय दीक्षित




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