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तुम्हें में अगर पढ़ देता गीतों में

Abhay DixitAbhay Dixit January 4, 2022
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तुम्हें अगर में तस्वीर समझता,
तो तुम लग जाती मकानों में,
तुम्हें अगर में एक रीत समझता,
निभाता हर पल जमाने में।।

तुम्हें अगर में वक्त समझता,
तो तुम निकल जाती,
तुम्हें अगर में जीत समझता,
तो एक न एक दिन हार जाता।।

तुम्हें अगर में चाँद समझता,
तो तुम तारों से घिर जाती,
तुम्हें में अगर प्रेम समझता,
तो एक दिन पूरी हो जाती।।

तुम्हें अगर में आस्था समझता,
तो तुम पूजी जाती,
तुम्हें अगर में शरीर समझता,
एक दिन तो नष्ट हो जाती।।

तुम्हें में अगर पढ़ देता गीतों में,
तो सारा  जमाना  गुनगुनाता,
तुम्हें में अगर लिख देता किताबों में,
तो सारा  जमाना पढ़  जाता।।
~अभय दीक्षित

#प्रेम






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